सार्वजिनक सेवाओं के लिए दी गई 10 रुपए से लेकर 50 हज़ार तक की रिश्वत, पुलिस सेवा में सबसे ज़्यादा भ्रष्टाचार

That at lower levels in the country of corruption has decreased significantly. Although the total amount paid by families to public services over the last year has yet to Rs 6,350 crore, including the bribes went to ten rupees. One study concluded that unfolded.

नयी दिल्ली: देश में निचले स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार में काफी कमी आई है. हालांकि पिछले एक साल के दौरान सार्वजनिक सेवाओं के लिये परिवारों द्वारा दी जाने वाली कुल राशि अभी भी 6,350 करोड़ रुपए तक है जिसमें दस रुपए तक दी गई रिश्वत भी शामिल है. एक अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है.
सीएमएस-भारतीय भ्रष्टचार अध्ययन 2017 के अनुसार पिछले एक साल के दौरान करीब एक तिहाई परिवारों को साल में कम से कम एक बार सार्वजनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार का शिकार होना पड़ा. हालांकि, वर्ष 2005 में 53 प्रतिशत परिवारों को इस तरह का अनुभव झेलना पड़ा था.
अध्ययन में जितने परिवारों से बात की गई उनमें से 43 प्रतिशत ने ही यह कहा कि पिछले एक साल के दौरान सार्वजनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार बढ़ा है, जबकि इससे पहले 2005 में 73 प्रतिशत ने सार्वजनिक सेवाओं के मामले में भ्रष्टाचार बढ़ने की बात कही थी.
अध्ययन के अनुसार पुलिस और न्याययिक सेवाओं जैसे कुछ लोक सेवाओं में भ्रष्टाचार में कमी आना काफी उल्लेखनीय है. वर्ष 2005 के मुकाबले 2017 में इन सेवाओं में भ्रष्टाचार में कमी आई है. देश भर में 20 राज्यों में 2017 में परिवारों ने दस सेवाओं के लिये एक अनुमान के मुताबिक 6,350 करोड़ रुपए की रिश्वत दी जबकि वर्ष 2005 में यह राशि 20,500 करोड़ रुपए थी।
अध्ययन के मुताबिक ज्यादातर राज्यों में विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं को पाने के लिये 100 से 500 रुपए तक की रिश्वत दी गई. हालांकि कई मामलों में कम से कम दस रुपए और अधिकतम 50,000 रुपए तक की भी रिश्वत दी गई.
जिन सार्वजनिक सेवाओं में लोगों ने भ्रष्टाचार की बात मानी है उनमें पुलिस सेवा में 34 प्रतिशत लोगों ने भ्रष्टाचार की बात कही, भूमि और आवास क्षेत्र में 24 प्रतिशत ने, न्याययिक सेवाओं में 18 प्रतिशत, कर के मामले में 15 प्रतिशत और सस्ता राशन के मामले में 12 प्रतिशत ने भ्रष्टाचार की बात स्वीकारी.

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